हमारा देश भारत में जब जब चुनाव का वक्त आता है तब विकास क ज्वलंत मुद़दा बनकर सामने खड़ा होता है। हर बार सत्ता पक्ष के अनुसार विकास की गंगा बहाने की बात की जाती है और विपक्ष के नजरों से कहीं विकास दिखता ही नहीं है। आम जनता भी कन्फयूज, कि विकास हुआ है कि नहीं? ये बात हम पैंतीस चालिस सालों से सुनते आ रहे हैं। हर बार चुनाव के बाद सबके जुवां पर होता है-इस बार विकास होकर रहेगा। चुनाव के बाद विकास लोगों के नजरों से कोंसों दूर होता है।
असल में विकास क्या है? ये हम समझ ही नहीं पा रहे हैं। बात विकास की हो चली है तो हम एक एक करके सभी राष्ट्रीय मुदों पर चर्चा करेंगे।
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